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Showing posts from August, 2010

Jo bhi jitni bar likhunga.....tum par hi har baar likhunga....:))

Hi friend,
It has been a really  long time i have come up with something. Here it is, as all I was wondering that what to write about?? So I wrote, what I write....A poem....



This post is for you, my beloved reader.....

जो भी जितनी बार लिखूंगा,
तुम पर ही हर बार लिखूंगा!


दिल के कोरे काग़ज़ पर,
अब नाम तेरा ‘सरकार’ लिखूंगा....


तुम दो उत्तर, या ना दो तुम;
ख़त मैं बारम्बार लिखूंगा....                          (बारम्बार= always)


लाख़ करो तुम नफ़रत हमसे,
‘नफ़रत’ को भी ‘प्यार’ लिखूंगा......


सरल नहीं सच्चाई लिखना,
पर मैं सच हर बार लिखूंगा`.....


इश्क़ के आँसू, आँख में भरकर;
याद करूँगा, ‘प्यार लिखूंगा’....


कभी कभी मुश्ताक़ लिखूंगा,                   ( मुश्ताक़ = interested, eager)
कभी कभी बेज़ार लिखूंगा,                       ( बेज़ार=angry, displeased)


लाख पुरानी बातें हो,
‘दो’ याद करूँगा; ‘चार’ लिखूंगा.....


शेर, पुराने क़िस्से, ग़ज़लें;
अपनी कुछ गुफ्तार लिखूंगा,               (गुफ्तार=Conversation, Discourse)


छाँट लो तुम; जो भी चुनना है,
मैं पूरा बाज़ार लिखूंगा......


मेरी ग़ज़ल …